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खुश रहने का तरीका

Posted by Arun Kumar Thursday, May 26, 2011

  खुश रहने का तरीका    
 बात उन दिनों की है जब मै गर्मियों की छुट्टियों में दिल्ली आर के पुरम में अपने चाचा के यहाँ गया हुआ था. मै शाम  पांच बजे चाचा के यहाँ पहुँच कर चाय की चुस्कियां ही ले रहा था तभी पड़ोस  वाले घर में किसी के चिल्लाने की आवाज आने लगी मैंने ध्यान लगाकर सुना तो पाया की पड़ोस वाले माकन में रहने वाला आदमी अपनी बीवी पर बुरी तरह से चिल्ला रहा था तथा बच्चो को पीट रहा था . मैंने चाची से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया की ये तो इन लोगो का रोज का काम है .अगले दिन फिर से वही हुआ ऐसा मैंने चार पांच दिन तक लगातार देखा लकिन एक बात थी वह आदमी जब काम से वापस आता था तभी झगडा करता था नहीं तो सुबह के समय मैंने उनके घर में हमेश शांति ही देखी थी.
             अगले दिन मैंने कुछ सोचा और जब वह आदमी घर से सुबह काम के लिए निकला तो मैंने उसका पीछा किया. वह थोड़ी ही दूर किसी जेनेरल स्टोर में काम करता था . मैंने देखा की उसका मालिक बड़ा ही खडूस था और हमेशा  उस पर चिल्लाता ही रहता था इस वजय से वह परेशान रहता था और घर आकर सारा गुस्सा बीवी और  बच्चो पर उतारता था. उस दिन भी वही हुआ वह शाम को घर आया और सब लोगो पर खूब चिल्लाया. अगले दिन सुबह मैंने उसे रस्ते में रोका और उसे समझाया की गुस्सा निकलने के और भी तरीके होते है इस तरह से बीवी बच्चो को परेशान करना ठीक नहीं, वह कुछ नहीं बोला और चुपचाप निकल गया.
             उस दिन शाम को वह घर आया मैंने देखा वह बड़ा खुश था उसने घर में घुसने से पहले ही बाहर खेल रही अपने लड़की को गोदी में उठाया और प्यार से उसके सर पर हाथ फेर कर उसे चोकलेट दिया  फिर खुश होकर अन्दर चला गया. उस दिन के बाद हर रोज यही होने लगा और उनके घर में एकदम से शांति और प्यार आ गया. अब मेरे दिल में सवाल उठा की आखिर ये संभव कैसे हुआ कि इतना गरम मिजाज़ आदमी अचानक बदल कैसे गया. ऐसा सोचकर मैंने अगले दिन फिर उसका पीछा किया उसके दफ्तर में उसदिन भी वही हुआ उसके मालिक ने उसे जी भर कर डांटा, और वह भी गुस्से से तिलमिला गया. मै पूरा दिन बाहर बैठा उसका इंतजार करता रहा कि शायद ये आज फिर घर जाकर अपने पुराने व्यवहार पर आ जायेगा . आते वक़्त मैंने फिर उसका पीछा किया, वह गुस्से में लाल था लकिन ये क्या वह घर जाने के बजाय पास के एक सुनसान से जगह पर गया वहां मैंने देखा उसने अपने मालिक कि फोटो लगा रखी थी और उसे चप्पलो की माला पहना रखी थी, वहां बैठकर उसने अपने मालिक को खूब गलियां दी खूब कोसा लगभग दस पन्द्रह मिनट बाद जब उसका गुस्सा शांत हुआ तो वह घर की तरफ निकल चला रस्ते से बच्चों के लिए फल खरीदे और घर पहुँच गया. और सब के साथ अच्छा बर्ताव किया.मुझे बड़ी ख़ुशी हुई . जब मैंने चाची को इस घटना के बारे में बताया तो चाची ने खुशी में मेरी पीठ थपथपा दी. सही बात है इन्सान को खुश रहने के तरीके खुद ही ढूँढने पड़ते है.

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